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सफाई कर्मचारी चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय

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  स्वच्छता के सिपाही को नमन   नमस्कार साथियों हम सब कर रहे हैं स्वच्छता के सिपाहियों को नमन इसके अंतर्गत आज हम बात कर रहे हैं चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय (भिवानी) के स्वच्छता सिपाही अमित कुमार के साथ खास मुलाकात  नमस्कार जी  प्रसन्न –माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए गए स्वच्छ भारत अभियान के बाद लोगों की मानसिकता किस प्रकार बदली है। अमित कुमार – वास्तविक कार्य कर्मचारी करता है लेकिन इस योजना के बाद लोगों का सहयोग मिलने लगा है अब बड़े बड़े लोग भी सफाई करने में शर्म महसूस नहीं करते है वे फोटो खिंचवाने के बहाने ही सही लेकिन हमे मदद मिल जाती है तो कुछ बदलाव आया है। प्रश्न – स्वच्छ भारत अभियान के बाद सारे सफाई बंधुओ को अपने पर गर्व महसूस होता है? गर्व है इस बात का कि हम अपना कार्य पूरी तरह से कर रहे है। शिविर से लेकर कूड़ाघार तक सफाई करते है। किसी भी कार्य की शुरुआत भी हम करते है और अंत भी। इस अभियान से लोगों का हमारे प्रति नजरिया भी बदला है। कुल मिलाकर अच्छी योजना है। प्रश्न – स्वच्छ भारत अभियान के बाद ये माना जाने लगा है की आप सभी सफाई बंधु देश की बहुत ...

भारतीय मूल के ऋषि सुनक होंगे ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री

द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात पंजाब से ब्रिटेन का पुनर्स्थापन एवं पुनर्निर्माण के लिए ब्रिटेन में प्रवास करने वाले भारतीय मूल के ऋषि सुनक होंगे ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री। ये एक सामान्य परिवार से संबंध रखने वाले हैं। इनका जन्म ब्रिटेन के साउथेंप्टन क्षेत्र में भारतीय परिवार में हुआ। इनकी मां एक फार्मासिस्ट है और इनके पिता राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के सामान्य चिकित्सक है। यह ऑक्सफोर्ड और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से स्नातक है। इनकी शादी इंफोसिस के सह संस्थापक नारायण मूर्ति की बेटी अक्षता मूर्ति से हुई है। वर्ष 2020 में यह वित्त मंत्री बने। 42 वर्ष की उम्र में सुनक राष्ट्र के पिछले 200 वर्षों के इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री होंगे। ये कंजर्वेटिव पार्टी से संबंध रखते हैं जिन्हें आधिकारिक तौर पर कंजर्वेटिव और यूनियनिस्ट पार्टी के नाम से जाना जाता है। ऋषि सुनक 28 अक्टूबर को प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करेंगे।

स्वदेसी दिवाली

 भारत एक ऐसा देश है जहां पर घर पर समान पहुंचाने की सुविधा अनादि काल से है और समय और त्योहारों के साथ अलग अलग व्यक्ति अलग अलग समान जरूरत के अनुसार पहुंचाते रहते है।आज दिवाली का त्यौहार है और कुम्हारी गांव में सभी के घरों में दीए पहुंचा चुकी है। पुराने समय में सभी व्यक्ति घी के दीए एवं मिठाइयों के साथ ही दिवाली मनाते थे लेकिन आज माहौल थोड़ा बदलता जा रहा है मनुष्य पर सभ्यता के आवरण इस तरह से चढ़ गए हैं कि वह केवल दीयों के साथ दिवाली बनाने में खुद को गरीब एवं तुच्छ समझता है जो की बहुत बड़ी समस्या है आज मनुष्य खुद को भूलता जा रहा है और शहरों में तो लोग बिल्कुल डूब ही चुके है आज मनुष्य दियों के साथ लड़ी, मोमबत्ती, मॉम के दिए, पटाखे और अन्य दिखावटी समान को साथ में जोड़ लिया है जो कि फिजूल खर्च है और सबसे बड़ी समस्या यह है कि मनुष्य ऐसा करना नहीं चाहता है बस उसके दिमाग में यह बैठा दिया गया है कि इसी से हम सभ्य दिखते हैं और मनुष्य जितना सभ्य दिखने के आवरण चढ़ाएगा खुशियों से उतना ही दूर होता चला जाएगा इसलिए हमारी खुशियों को बचाने के लिए क्यों न हम मिलकर इन आवरणों को तोड़ दे और साधारण मनुष्य ...

अग्निपथ योजना

 नमस्कार साथियों आज हम हैं नवीन शिवाल और आदित्य के साथ जो साहित्य के विद्यार्थी हैं दुर दृष्टि रखने वाले हैं अच्छी समझ है इनके साथ हम आज अग्निपथ योजना के बारे में बात करेंगे विचार विमर्श करेंगे मैं एक-एक करके इनसे जो इस योजना के बारे में मिथक फैले हुए हैं उनके बारे में पुछुगा और जो ये बताएंगे वह आप सबके सामने प्रकट करूगा। प्रश्न 1-क्या अग्निवीरों का भविष्य असुरक्षित है? - सेना से रिटायर होने के बाद ऐसे 'अग्निवीर' जो कारोबार शुरू करना चाहेंगे उन्हें वित्तीय मदद दी जाएगी। उन्हें बैंक लोन भी मिलेगा। ऐसे 'अग्निवीर' जो आगे पढ़ाई करना चाहेंगे उन्हें 12वीं कक्षा के बराबर का सर्टिफिकेट एवं ब्रिजिंग कोर्स जाएगा। इन्हें सीएपीएफ एवं राज्यों की पुलिस की भर्ती में वरीयता दी जाएगी। सरकार के अन्य उपक्रमों में भी इन्हें समायोजित किया जाएगा।  प्रश्न 2- अग्निपथ के कारण युवाओं के लिए अवसर कम हो जाएंगे?  तथ्य- इसके उलट युवाओं के लिए सेना में नौकरी के अवसरों में बढ़ोतरी होगी. आने वाले वर्षों में सेना में अग्निवीरों की भर्ती मौजूदा स्तर के तीन गुना हो जाएगी। प्रश्न 3- रेजीमेंट में भाईचारे पर ...

अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस 2022

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस प्रतिवर्ष 21 फरवरी को मनाया जाता है। 2022 की थीम- " बहुभाषी शिक्षा के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग: चुनौतियां और अवसर "( थीम हर वर्ष यूनेस्को तय करता है) आज विश्व में लगभग 6000 भाषाएं बोली जाती हैं इनमें अनेक के विलुप्त होने के खतरे को ध्यान में रखकर यह दिवस घोषित किया गया। भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के बारे में जागरूकता बढ़ाना और बहुभाषावाद को बढ़ावा देना ही इसका उद्देश्य है । जब भारतीयों पर मुगलों का शासन था तो वह भारतीयों पर फारसी भाषा थोपना चाहते थे और जब भारत में ब्रिटिश शासन आया तो वे भारतीयों को अंग्रेजी के रंग में रंगना चाहते थे जिसमें एक सीमा तक सफल भी रहे। लेकिन जब भारत आजाद हुआ और भारत का विभाजन हुआ तो पाकिस्तान भी दो भागों में बट गया था एक पूर्वी पाकिस्तान जो आज बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है। पाकिस्तान बांग्लादेश पर उर्दू थोपकर उसे सांस्कृतिक गुलामी में रख रहा था। बांग्लादेश वालों ने भले ही इस्लाम को कबूल कर लिया हो परंतु उनकी भाषा अस्मिता संस्कृति सब कुछ अलग थी और उनकी आत्मा बार-बार अपनी भाषा संस्कृति के दमन से घुटन अनुभव करने लगी...