अग्निपथ योजना

 नमस्कार साथियों आज हम हैं नवीन शिवाल और आदित्य के साथ जो साहित्य के विद्यार्थी हैं दुर दृष्टि रखने वाले हैं अच्छी समझ है इनके साथ हम आज अग्निपथ योजना के बारे में बात करेंगे विचार विमर्श करेंगे मैं एक-एक करके इनसे जो इस योजना के बारे में मिथक फैले हुए हैं उनके बारे में पुछुगा और जो ये बताएंगे वह आप सबके सामने प्रकट करूगा।

प्रश्न 1-क्या अग्निवीरों का भविष्य असुरक्षित है?

- सेना से रिटायर होने के बाद ऐसे 'अग्निवीर' जो कारोबार शुरू करना चाहेंगे उन्हें वित्तीय मदद दी जाएगी। उन्हें बैंक लोन भी मिलेगा। ऐसे 'अग्निवीर' जो आगे पढ़ाई करना चाहेंगे उन्हें 12वीं कक्षा के बराबर का सर्टिफिकेट एवं ब्रिजिंग कोर्स जाएगा। इन्हें सीएपीएफ एवं राज्यों की पुलिस की भर्ती में वरीयता दी जाएगी। सरकार के अन्य उपक्रमों में भी इन्हें समायोजित किया जाएगा। 

प्रश्न 2- अग्निपथ के कारण युवाओं के लिए अवसर कम हो जाएंगे? 

तथ्य- इसके उलट युवाओं के लिए सेना में नौकरी के अवसरों में बढ़ोतरी होगी. आने वाले वर्षों में सेना में अग्निवीरों की भर्ती मौजूदा स्तर के तीन गुना हो जाएगी।


प्रश्न 3- रेजीमेंट में भाईचारे पर असर पड़ेगा?

 तथ्य- रेजीमेंट व्यवस्था में कोई भी परिवर्तन नहीं किया जा रहा है बल्कि, यह और मजबूत होगा क्योंकि सबसे उत्कृष्ट अग्निवीरों का चयन होगा और इससे यूनिट के अंदरूनी तालमेल को और मजबूती ही मिलेगी.

 प्रश्न 4-इससे सेना के तीनों अंगों की क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा?

 तथ्य- सूत्रों ने बताया कि अधिकांश देशों में इस तरह की कम अवधि वाली सेवाओं की व्यवस्था है यानी इसका पहले ही परीक्षण हो चुका है और युवा तथा तेजतर्रार सेना के लिए सबसे अच्छी व्यवस्था मानी जाती है.पहले वर्ष भर्ती अग्निवीरों की संख्या आर्म्ड फोर्सेज़ की केवल 3 प्रतिशत होगी. इसके अलावा, चार साल बाद सेना में दोबारा भर्ती से पहले अग्निवीरों के प्रदर्शन की जांच की जाएगी. इस तरह, सेना को सुपरवाइजरी रैंक के लिए जांचे और परखे लोग मिलेंगे.


प्रश्न 5- सेना के लिए 21 वर्ष के युवा परिपक्व और भरोसमंद नहीं हैं? 

तथ्य- दुनिया भर में सेनाएं युवाओं पर निर्भर हैं. किसी भी समय अनुभवी लोगों की संख्या में युवा अधिक नहीं होंगे. मौजूदा योजना दीर्घ काल में युवाओं तथा अनुभवियों के 50-50 प्रतिशत का मिश्रण लाएगी.


प्रश्न 6- अग्निवीर समाज के लिए खतरा होंगे और आतंकवादियों से मिल जाएंगे?

 तथ्य- यह भारतीय सेना के मूल्यों तथा आदर्शों का अपमान है. चार साल वर्दी पहनने वाले युवा जिंदगी भर देश के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे. आज भी सेना से रिटायर हुए हजारों लोग हैं जिनके पास तमाम कुशलताएं हैं लेकिन वे देश विरोधी ताकतों से नहीं जुड़े.


प्रश्न 7- पूर्व सैन्य अधिकारियों से चर्चा नहीं हुई? 

तथ्य- पिछले दो वर्षों से पूर्व सैन्य अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की गई. यह प्रस्ताव मिलिट्री ऑफिसर विभाग में मिलिट्री ऑफिसरों द्वारा तैयार किया गया. यह विभाग सरकार ने ही गठित किया है. कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने इस योजना को स्वीकार किया है तथा सराहा है.

अंत में यही कहा जा सकता है कि कुल मिलाकर यह योजना ठीक भी है और कुछ निर्णय इसमें गलत भी है जैसे कई बच्चों की लिस्ट ही लगनी थी अंतिम लिस्ट का इंतजार कर रहे थे और लग चुके थे उनको रिजल्ट भी पता था बस उनके साथ अन्याय हुआ है और एक पेंशन बंद करने का निर्णय भी गलत है फौजियों के लिए तो पेंशन होनी चाहिए और अगर फौजी की कालावधि घटाई गई है तो सदनवीरों की कालावधि कटाने चाहिए उनकी 5 साल से दो या ढाई साल कर देनी चाहिए।

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